हरड़ के गुण और स्वास्थ्य लाभ
वैज्ञानिक नाम-Terminalia Chebula
रासायनिक संगठन:
हरड़ में ग्राही एस्ट्रिजेंट पदार्थ है, टैनिक अम्ल 20-40%,
गैलिक अम्ल,
चेबूलिनिक अम्ल और म्यूसीलेज।
रेचक पदार्थ है इक्त्रऑक्वानिन जाति के ग्लाइको साइड्स । वेल्थ ऑफ इंडिया के अनुसार ग्लूकोज, सर्बिटोल, फ्रक्टोस, सुक्रोज माल्टोज एवं अरेबिनोज हरड़ के प्रमुख कार्बोहाइड्रेट है।
गैलिक अम्ल,
चेबूलिनिक अम्ल और म्यूसीलेज।
रेचक पदार्थ है इक्त्रऑक्वानिन जाति के ग्लाइको साइड्स । वेल्थ ऑफ इंडिया के अनुसार ग्लूकोज, सर्बिटोल, फ्रक्टोस, सुक्रोज माल्टोज एवं अरेबिनोज हरड़ के प्रमुख कार्बोहाइड्रेट है।
हरड़ में 18 प्रकार के अमीनो अमल मुक्त अवस्था में पाए जाते हैं फास्फोरस तथा सक्सीनिक अमल भी उस में उच्च मात्रा में होते हैं।
आयुर्वेद में हरड़ सर्वोच्च स्थान पर है।
यह पेट में जाकर हमारे शरीर की मां के समान देखभाल करती है।
राजबल्लभ निघणटु के अनुसार:
यस्य माता गृहे नास्ति,तस्य माता हरितकी।
कदाचिद कुप्यते माता,नोदरस्था हरितकी।।
(अर्थात हरीतकी मनुष्यों की माता के समान हित करने वाली होती है माता तो कभी कभी नाराज भी हो जाती है परंतु उदर (पेट)मैं खाई हुई हरड़ कभी भी अपकारी नहीं होती है।)
हरड़ में लवण के अलावा 5 रसों का समावेश होता है।
हरड़ बुद्धि को बढ़ाने वाली और हृदय को मजबूती देने वाली, पीलिया,शोथ, मुत्राघात, दस्त उल्टी कब्ज संग्रहणी प्रमे है कामला सिर और पेट के रोग, कर्ण रोग, खांसी, प्लीहा,बवासीर, वर्ण,शूल(दर्द )आदि का नाश करने वाली होती है।
लिवर स्प्लीन बढ़ने तथा उद्रस्थ कर्मी आदि रोगों के इलाज के लिए हरड़ के चूर्ण का सेवन करते हैं।
हरड़ त्रिदोष नाशक है परंतु इसे विशेष रूप से वातशामक माना जाता है।
अपने इसी वातशामक गुण के कारण हमारा संपूर्ण पाचन संस्थान इससे प्रभावित होता है।
यह दुर्बल नाड़ियों को मजबूत बनाती है तथा कोशिए तथा अंटर्कोशिए किसी भी प्रकार के सूजन के निवारण में प्रमुख भूमिका निभाती है।
यह टैनिक एसिड, म्यूसिलेज आंतों की श्लेष्मा, झिल्लीयो पर श्लेष्मा तथा एल्बुमिन की परत जमा कर उनके कोमल भाग की रक्षा करती है।
हरड़ बडी आंत में जमा मल को उसकी संकुचन क्रिया बढ़ाकर निकाल बाहर करता है।
भारतीय संस्कृति में षड रितु विधान है।
हरड़ को वसंत ऋतु में शहद के साथ।
ग्रीष्म में गुड़ के साथ।
वर्षा में सेंधा नमक के साथ।
शरद में देसी खांड के साथ।
हेमंत में सौंठ के साथ।
शिशिर में पीपल के साथ प्रयोग करना हितकारी होता है। pic from bellybites.com
वर्षा में सेंधा नमक के साथ।
शरद में देसी खांड के साथ।
हेमंत में सौंठ के साथ।
शिशिर में पीपल के साथ प्रयोग करना हितकारी होता है। pic from bellybites.com
हरड़ पेट की बीमारियों के साथ और भी बहुत से बीमारी में बहुत लाभ पहुंचाता है इसके कुछ लाभ इस प्रकार हैं:
हरड़ से बनी गोलियों का सेवन करने से भूख बढ़ती है ।
हरड़ का चूर्ण खाने से कब्ज से छुटकारा मिलता है।
उल्टी होने पर हरड़ का सेवन करने से उल्टी आना बंद हो जाता है।
हरड़ को पीसकर आंखों के आसपास लगाने से आंखों के रोगों में छुटकारा मिलता है।
भोजन के बाद अगर पेट में भारीपन महसूस हो तो हरड़ का सेवन करने से राहत मिलती है।
हरड़ का सेवन लगातार करने से शरीर में थकावट महसूस नहीं होती और स्फूर्ति बनी रहती
है।
है।
हरड़ का सेवन करने से खुजली कैसे रूप से भी छुटकारा पाया जा सकता है हरड़ शरीर के सभी प्रकार के घावो को भर देता है।
हरड़ को नमक के साथ मिलाकर खाने से कफ,
तथा गुड़ के साथ खाने से सभी बीमारियों का नाश हो जाता है।
खांड के साथ खाने से पित्त,
घी के साथ खाने से वायुतथा गुड़ के साथ खाने से सभी बीमारियों का नाश हो जाता है।
केवल हरड़ छोटे बच्चों को भी दी जा सकती है।
चेतावनी:हरड़ का सेवन गर्भवती स्त्रियों को नहीं करना चाहिए।




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