उपवास का स्वास्थ्य पर प्रभाव
उपवास का स्वास्थ्य पर प्रभाव -Photo by Eiliv-Sonas Aceron on Unsplash
उपवास शब्द को आधुनिक वैज्ञानिक भाषा में ऑटोफागी कहा जाता है।
2016 में जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओसुमी ने ओटोफागी की खोज की जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
ऑटोफागी की प्रक्रिया-ऑटोफेगी दो शब्दो से मिलकर बना है। ऑटो और फैगी उसका अर्थ है शरीर द्वारा खुद को खाना।
10-12 घंटे के उपवास के दौरान कोशिकाएं शरीर की क्षतिग्रस्त व खराब कोशिकाओं को खुद ही खत्म करने लगती है , पोषक तत्वों के अभाव में यह इन मृत कोशिकाओं को शरीर से बाहर निकाल कर हमें ऊर्जावान रखने में मदद करती है,तथा उम्र बढ़ने की गति को भी धीमा कर देती है।
ऑटोफागी कैसे काम करता है -जब शरीर की कोशिका इस प्रक्रिया को शुरू करती है तो मस्तिष्क अलर्ट मोड में रहता है, तनाव की स्थिति को कम करती है,हानिकारक जीवाणुओं से शरीर की रक्षा करती है।
जर्मनी में एक शोध किया गया जिसमें पाया गया कि उपवास(ऑटोफागी) से उम्र लंबी होती है यह कई बीमारियों में फायदेमंद है इस शोध के दौरान चूहों के दो समूह बनाए गए एक समूह के चूहों को भरपूर भोजन दिया गया तथा दूसरे समूह के चूहों को एक तय सीमा तक ऑटोफागी उपवास की अवस्था में रखा गया। निष्कर्ष में यह पाया गया कि दूसरा समूह है जिसे उपवास अवस्था में रखा गया था,के चूहों की उम्र पहले समूह की तुलना में 5 % ज्यादा बढ़ गई थी।
शोध में यह बात सामने आई कि जो लोग कम खाते हैं उनका शरीर ज्यादा समय तक फिट रहता है वही ज्यादा खाने वालों का शरीर उम्र से पहले ही ढल जाता है।
12 घंटे तक कुछ ना खाने वाले लोगों में शरीर में ऑटोफागी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिसे शरीर खराब कोशिकाओं को खत्म करने लगता है और उनके स्थान पर नई कोशिकाओं का निर्माण करता है,शुरू में इस प्रक्रिया के कारण शरीर बहुत ज्यादा परेशान होता है लेकिन बाद में यह शरीर की दैनिक दिनचर्या में शामिल हो जाता है।
आजकल गलत खानपान और खराब जीवनशैली की वजह से मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। मोटापे से मेटाबोलिक सिंड्रोम होता है जिसे फैटी-लीवर, हाई -ब्लड -प्रेशर, हाई -कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन, माइक्रोवस्कुलर संबंधित बीमारियां होती है। जीवन शैली में बदलाव लाकर और मोटापा कम करके इन बीमारियों से आसानी से बच सकते हैं।
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यायाम के लिए समय निकालना काफी मुश्किल हो गया है यह ऑटोफागी(उपवास) की प्रक्रिया काफी हद तक व्यायाम का स्थान ले लेती है यथा संपूर्ण रूप से तो नहीं ।Photo by Alexander Mils on Unsplash
उपवास के फायदे
ऑटोफागी(उपवास) से शरीर के दोष,धातु ,मल एक समान अनुपात में बने रहते हैं।
तीन शारीरिक दोष- वात, पित्त, कफ। मानसिक दोष - रज व तम है,उपवास यह से य़े सब संमभाव में आते हैं।
7 धातुएं- रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि,मज्जा व शुक्र दशम भाव में रहते हैं। उपवास से मल मूत्र व स्वेद(पसीना), संबंधित अंग सुचारू काम करते हैं
बिना पचे दोबारा खाने से शरीर में जूसेज,ग्लूकोज, एमिनो एसिड, ट्राइग्लिसराइड आदि तत्व सही रूप से नहीं बनते,जिससे लिया गया भोजन जहर के समान कार्य करता है। उपवास के कारण इन सब का पाचन शरीर में समान रूप से हो जाता है और लिया गया भोजन अमृत के समान कार्य करता है।
हमें सप्ताह में 1 दिन 10 से 12 घंटे तक उपवास करना जरूरी है इससे शरीर में तेजी से कोशिकाओं का पुनर्निर्माण होता है।
उपवास के दौरान सुबह हल्का फलाहार,देर शाम हल्का सुपाच्य आहार ले। पूरे दिन भरपूर पानी पी सकते हैं। इससे शरीर से विषैले तक विषैले तत्व निकलेंगे।
10 से 12 घंटे तक का उपवास रखने से शरीर में एंटीऑक्सीडेंट रिलीज होते हैं उपवास की प्रक्रिया शरीर के आंतरिक अंगों को आराम देने की प्रक्रिया है।
चेतावनी - डायबिटीज, पार्किंसन ,पाचन संबंधी समस्या से ग्रस्त लोग बिना चिकित्सक के परामर्श के उपवास ना करें क्योंकि शारीरिक अवस्था ऑटोफागी में आने पर उन्हें शारीरिक परेशानी होने की आशंका बढ़ जाती है।




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